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संघ की पत्रिका : एक सिंघावलोकन
एकता
प्रतिज्ञा तीन अक्षर का शब्द : जीवन, मरण, कसम, शपथ इन सभी में भी तीन अक्षरों का ही
खेल है और इन सभी शब्दों में एक विचित्र सामन्जस्य स्थपित रखती है। एकता के ना होने
से मृत्यु एकता बनी रहने से जीवन एक्ता की कसम, सशथ या प्रतिज्ञा से ही संगठन में जान
पड़ती है। तीन लोक की तरह एकता भी तीन आधार प्रदान कर्ती है, संगठनात्मक, भावनात्मक
एवं सामजिक। तीन गुंण (सत्व, रज, तम) एकता में भी हैं। प्रचार-प्रसार एवं कार्यशैली
की समालोचना का।
उत्तर
प्रदेश के कोने-कोने फैले हमारे डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ के सदस्यों के बीच संवाद स्थापित
करने का काम जो नेट्वर्क करता है, उसका नाम है- एकता। यह छोटा सा सुन्दर सा सारमर्भित
नाम स्वयै को चरितार्थ कर रहा है संघ को अपनी बात प्रभावी ढंग से करने के लिये अपने
क्रियाकलापों की जानकारी हर सदस्य तक पहुंचाने एवं संघ के कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी
सुनिश्चित करने के लिये एक पत्रिका की कमी काफी लंबे अरसे से पूर्ण शिद्द्त के साथ
महसूस की जा रही थी, बस कमी थी कि कोई संकल्प लेकर इस दिशा में ठोस कदम उठाए और इस
दिशा में पहला कदम अगस्त 1981 ई० जे० एन० श्रीवास्तव के नेतृत्व में संघ की केन्द्रीय
कार्यकारिणी की वारणसी में आयाकजित बैठक में उठाया गया जिसमें एक मासिक पत्रिका के
प्रकाशन का निर्णय लिया गया। यद्यपि पहले भी संघ द्वारा पत्रिकाएं निकाली जाती रही
थी परन्तु वे अनियमित तथा लगभग स्मारिका का रुप लिये होती थी उक्त निर्णय से पूर्व
लगभग कुल 50 पत्रिकाएं ही निकल सकी थीं। संघ द्वारा पत्रिका निकालने की अनुमती उ०प्र०
शासन से वर्ष 1950 में ही प्राप्त कर ली गई थी, परन्तु हम किन्हीं कारणों वश नियमित
पत्रिका नहीं निकल सके। शासन द्वारा प्रदत्त अनुमती पत्र नीचे दिया जा रहा है। वर्तमान
संविधान के अनुसार संघ की चार स्तरीय सार्यकारिणी हैं |
Conditions for publication
of the magazine
The government of Uttar Pradesh
have allowed the publication of the Magazine on the condition given below vide g.
o. no. 642- ENR-26 ENR 1949 DATE, MARCH 29 1950.
1.
The magazine-is
not utilized for making propaganda against the department or government.
2.
Subscriptions
to the magazines are invited absolutely on voluntary basis.
3.
Funds for
meeting the initial cost of the magazine and shortages. If any which may occur in
future are raised from amongst the members of the association.
4.
The magazine
should be confirmed to engineering and literary subjects and there should be no
expression of political views in it.
हमें कोई भी शुभ कार्य सफलता
पूर्वक सम्पन्न करने के लिये तमाम बाधाओं का सामना कर्ना पड़ता है और यह पत्रिका
भी इससे अछूती नहीं रही। लिहाजा 9181 के निर्णय का मूर्त रूप देने में लगभग तीन वर्ष
का समय लगा। इस ऐतिहासिक शुरुआत के कर्णधार वर्ष 84 में चुने गये अध्यक्ष इं.के.एम.
लाल बने। इस पत्रिका के प्रकाशन एवं वितरण का गरुतर दायित्व का निर्वाह इं. राजेन्द्र
नाथ दीक्षित ने किया।
एकता
का सर्वप्रथम अंक जुलाई 1984 में उसके सदस्यों के हाथ में पहुचा। इसके प्रथम दो
अंक समस्त खण्डीय सचिवों का निःशुल्क भेजे गये परन्तु विसपनों में आशतीत आय न होने
के कारण यह योजना सफलता की सीढ़ियाँ नहीं चढ़ सका। सितम्बर 94 से इसकी एक वर्षीय सदस्यता
प्ररम्भ की गई फिर भी सदस्यता कम होने के कारण पत्रिका बंद होने के कगार पर ही थी कि
ऐसे में रामपुर जनपद ने इसके अगले अंक के व्यय का भार स्वयं वहन सरने की घोषणा से इसे
संकट से उबार लिया। यह एक ऐसी प्रेरणा दायक मिसाल थी कि बाद में अन्य जनपदों ने भी
इसका अनुसरण किया।
आपकी
प्यारी पत्रिका की प्रचार-प्रसार कर संख्या में समय एवं परिस्थितियों के अनुसार उतार-चढ़ाव
आता रहा है। परन्तु सदस्यों का स्नेह बराबर मिलता रहा है।
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